Thursday, August 29, 2024
चण्डीका स्तुती
Wednesday, August 28, 2024
चण्डीका स्तुती
Tuesday, August 27, 2024
चण्डीका स्तुती
Monday, August 26, 2024
चण्डीका स्तुती
Sunday, August 25, 2024
चण्डीका स्तुती
देवी महात्म्य
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
42 त्रैलोक्ये तु भवेत् पूज्य: कवचेनावृत: पुमान
43 इदं तु देव्या: कवचं देवानामपि दुर्लभं
य: पठेत प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रधयान्युत:
दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्य च अपराजिता:
44 जीवेद्वर्षशतं संग्रामपमृत्यु विवर्जित:
नश्यन्ति व्याधय: सर्वे लूटता विस्फोटकादय
स्थावरं जंगमं चापि कृत्रिमं चापि यद्विषं।
कवच से आरक्षित पुरुष, तीनों लोकों में पूजनीय बनता है। देवों को भी दुर्लभ यह देवी कवच, जो जन रोज त्रिसंध्या में श्रद्धा से पड़ता है, उनको देवी के वरदान मिलेंगे। उनको त्रिलोक में पराजय न होगा, मगर विजय प्राप्त होती हैं। उनको अपमृत्यु नहीं होती है तथा वह सज्जन सौ साल, व्याधिहीन जीवन बिताएंगे। उनपर लगाया हुआ सभी काला टोना खत्म हो जाती है।
मां, है महामाये, मेरे देश पर विद्रोह करने वालों को मिटा दो। मेरे मित्रों का एवं मेरे रक्षा करो।
Saturday, August 24, 2024
चण्डीका स्तुती
Thursday, August 22, 2024
चण्डीका स्तुती
Wednesday, August 21, 2024
चण्डीका स्तुती
Tuesday, August 20, 2024
चण्डीका स्तुती
Monday, August 19, 2024
चण्डीका स्तुती
चण्डीका स्तुती
Friday, August 16, 2024
चण्डीका स्तुती
Thursday, August 15, 2024
चण्डीका स्तुती
Tuesday, August 13, 2024
चण्डीका स्तुती
Monday, August 12, 2024
चण्डीका स्तुती
Sunday, August 11, 2024
चण्डीका स्तुती
Saturday, August 10, 2024
चण्डीका स्तुती
Friday, August 9, 2024
चण्डीका स्तुती
आपदिं किं करणीयं
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।
देवी कवच स्तोत्र
अस्य श्री चण्डिका कवचस्य ब्रह्मा ऋषि: अनुष्टुप च्छंन्द: चामुंडा देवता अंग न्यास मायरो बीजं दिग्बंन्ध देवतास्तत्वं श्री त्रिगुणा देवी प्रीत्यर्थे जपे विनियोग:
कवच स्तोत्र, हमारे सभी अन्दर - बाह्य हमलों से कवच बनकर देवी हमें बचाता है। देवी अनेक रूप लेकर अपने अंदर रहकर रक्षा करवाते हैं।
Saturday, August 3, 2024
चण्डीका स्तुती
Thursday, August 1, 2024
चण्डीका स्तुती
Wednesday, July 31, 2024
चण्डिका स्तोत्र
कीलक स्तोत्र
अस्य श्री कीलक मंत्रस्य शिव ऋषि, अनुष्टुप च्छंन्द श्री महासरस्वती देवता, श्री जगदंबा प्रसाद सिधि केलिए जाप करें।
मार्कण्डेय उवाच:
विशुद्ध ज्ञान देहात तृवेदीदिव्य चक्षुसे
श्रेय: प्राप्तिनिमित्ताय नमः सोमार्ध धारिणे।।
सर्व मेतद्विजानीयानमन्त्राणामभि कीलकं
सो/पि क्षेममवाप्नोति सततं जाप्यतत्परा:
सिध्यन्तुच्चाडनादीनि वस्तुनि सकलान्यपि।
ऐतेन स्तुवतां देवीं स्तोत्र मात्रेण सिद्धयति।।
श्री परमेश्वर को नमन करते हैं। हमारे ऊपर लगा हुआ शपादि दोषशमन केलिए यह मन्त्रों का उपासना करना है। इसके उपासना से स्वयं के भूत-प्रेत, मारण उच्चाटन - नष्ट होते हैं। यह सब लाभ चण्डीका थ्यान करने से ही मिलता है।
