आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
31रोमकूपाणि कैमारी त्वचं वागीश्वरी तथा
रक्त मज्ज वसा मांसान्यस्ति मेदांसि पार्वती
32 आन्द्राणि कालरात्रिश्च पित्तंञमुकुडेश्वरी
पद्मावती पद्मकोशे कफे चूड़ामणि स्तथा।
मेरे रोम कूपों में देवी कुमारी विराज होकर रक्षा करते हैं। त्वजा को वागीश्वरी और रक्त मज्ज वसा मांस अस्ति मेदस आदि को माता पार्वती रक्षा करते हैं। अथडी को मां कालरात्रि और पित्त अग्नि को मुकुटेश्वरी संभाली है। देवी पद्मावती पद्मकोशें में रहकर वायुओं को रक्षा करते हैं और कब को मां चूड़ामणि रक्षा करते हैं।
इस प्रकार मेरे हर अंगों को शस्त्र धारिणि माताएं संभालते तो मुझे कोई डर नहीं।

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