Friday, August 16, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मोवाच: 
जया मे चाग्रत स्तातु विजया स्तातु पृष्ठत:
अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे च अपराजिता 18
शिखामुद्योतिनी रक्षेदुमा मूर्थिनि व्यवस्थिता
मालाधारी ललाटे च भृवौ रक्षेद् यशस्विनी 19
त्रिनेत्रा च भ्रुवो्रमध्ये यम्ख्ण्डा च नासिके
शंखिनी चक्षुषोरमध्ये श्रोत्रयोर द्वारवासिनि 20
कपोलै कालिका रक्षेत कर्णमूले तु शंकरि
नासिकायां सुगन्धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका 21
         जयादेवी मेरे रक्षा करने सामने खड़ी है। पीछे से विजया देवी मुझे रक्षा करते हैं। बाएं तरफ अजिताभ देवी और दक्षिण दिशा में अपराजिता मुझे संभालते हैं। मेरे शिखा केलिए उद्योतिनी, मूर्था उमा देवी और मालाधारी ललाट के रक्षा करते हैं। भ्रूवों को यशस्विनी देवी रक्षा करते हैं।
मां त्रिनेत्रा मेरे भ्रू मध्य, नासिकायां देवी यम्ख्ण्डा, नयनों को शँखिनी कानों को देवी द्वारवासिनी रक्षा करते हैं। कपोलों पर कालिका माता, कानों को शञरी, नासिकदंण्ड पर देवी सुगंन्धा, ओढों को चर्चिका देवी रक्षा करने वाले हैं।

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