Thursday, August 29, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
मूर्ति रहस्यमयं
ऋषि उवाच 
3 कमलाञुशपाशाबजैरलंकृतचतर्तुभुजा
इन्दिरा कमला लक्ष्मी: सारुक्मांबुजासना।
4 या रक्तदन्दिका नाम देवी प्रोक्ता मयान्खा
तपस्या स्वरूपं वक्ष्यामि श्रुणु सर्व भयापहं। 
    हमारे रक्षा करने जगदंबा; इन्दिरा, कमला, लक्ष्मी और श्री के रूप में चतुर भुजा और कमल,अंकुश, पाश, शंख आदि हथियार लेकर जागरूक खड़ी है। माता के रक्तदन्दिका स्वरूप जो अति भयानक है, वह सूनो।

Wednesday, August 28, 2024

चण्डीका स्तुती

 देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
मूर्ति रहस्यमयं
ऋषि उवाच 
1 नन्दाभगवती नाम या भविष्यति नन्दजा
सा स्तुता पूजिता भक्त्या वशीकुर्याजगत्रयं।
2 कनकोत्तमकान्ति: सुकान्तिकनकांम्बरा
देवी कनकवर्णाभा कनकोत्तमभूषणा। 
     लोकनन्मार्थ नन्दगोप के पुत्रि रूप में जन्मा नन्दाभगवती को भक्ति एवं श्रद्धापूर्वक पूजन कीर्तन करने वाले को तीनों लोक में सम्मान मिलेगा। 
    वह नन्दा देवी कनकवर्णकान्ति से कनक वर्ण से सुन्दर और पटांबर और कनकाभरण से अलंकृत है।
   हे मां चण्डीके, हमारे देश रक्षा के संकल्प में हम आपको पूजता है। हमारे रक्षा करो मां।

Tuesday, August 27, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
48 मनोन्नतिरभवेद् राज्ञ: तेजोवृद्धिकरं परं
मनसा वर्थते सो/पि कीर्तिमण्डितभूतले
49 जपेद् सप्तशतीं चण्डीं कृत्वातु कवचं पुरा
यात्रा भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननं
तावत तिष्ठंति मेदिन्यां सन्दति: पुत्र पौत्रिकी
50 देहान्ते परं स्थानं तत् सचरैरपि दुर्लभं 
प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादत:
51 पार्वती परमा विद्या ब्रह्मविद्या प्रदायिनी 
विशेषेणैव जन्दूनां नात्र सन्देहकारणं।
   देवी कवचं पढ़ने वाले कीर्तिमान, राज्य  सम्मानित होंगे। कवच कीर्तन उनको तेजस्वी बनाता है। कवचं पारायण करने के साथ चण्डीका स्तुती करने चाहिए। इस प्रकार देवी माहात्म्य कीर्तन करने वाले, पुत्र पौत्र आदि पुरुषार्थ प्राप्त कर अनंत काल यशस्वी रहकर शाश्वत परब्रह्म स्वरूप प्राप्त कर लेते हैं।
   हे मां चण्डीके, आप हमारे देश पर अराजकता करने वाले को नाश करो। हमें सरुप विजय एवं यश देने कि वरदान करो। श्री महादेवै नमः

Monday, August 26, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
45 अभिचारिणि सर्वाधिक मन्त्रयन्त्राणि भूतले 
भूचरा: खेचराझैव जलजाझौपदेशिका:
सहजा: कुलजा माला डाकिनी शाकिनी तथा 
46 अनदरीक्षचरा खोरा डकिनैश्च महाबला:
ग्रहभूतपिशाचाश्च यक्ष गन्धर्वराक्षसा:
47 ब्रह्मराक्षसवेताला: कुशमाण्डा भैरवाय:
नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदिसंस्तिते।
     मां महामाया के इस कवच जिसने धारण किया हो, उन्हें इस दुनिया में कोई मंत्र - तंत्र और आभिचार; ज़मीन पर या पानी में किया गया हो, दुष्ट देवताओं के बाधा, डाकिनी, शालिनी आदि दुर्दैवता, भूत-प्रेत आदि, यक्ष- गन्धर्व, राक्षस -ब्रह्मरक्षस, वेताल, कुशमाण्ड, भैरव आदि के उपद्रवियों; देवी कवच से नाश होता है।
  मां परमेश्वरी के स्मरण से उपासना से हमारे सारे समस्या हल होगी। शत्रुहानि होता है। संतुष्टि और ऐश्वर्या बढ़ती है।


Sunday, August 25, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 

आपदिं किं करणीयं ?

स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।

ब्रह्मेवाच :

42 त्रैलोक्ये तु भवेत् पूज्य: कवचेनावृत: पुमान

43 इदं तु देव्या: कवचं देवानामपि दुर्लभं

य: पठेत प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रधयान्युत:

दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्य च अपराजिता:

44 जीवेद्वर्षशतं संग्रामपमृत्यु विवर्जित:

नश्यन्ति व्याधय: सर्वे लूटता विस्फोटकादय

स्थावरं जंगमं चापि कृत्रिमं चापि यद्विषं।

    कवच से आरक्षित पुरुष, तीनों लोकों में पूजनीय बनता है। देवों को भी दुर्लभ यह देवी कवच, जो जन रोज त्रिसंध्या में श्रद्धा से पड़ता है, उनको देवी के वरदान मिलेंगे।  उनको त्रिलोक में पराजय न होगा, मगर विजय प्राप्त होती हैं। उनको अपमृत्यु नहीं होती है तथा वह सज्जन सौ साल, व्याधिहीन जीवन बिताएंगे। उनपर लगाया हुआ सभी काला टोना खत्म हो जाती है। 

     मां, है महामाये, मेरे देश पर विद्रोह करने वालों को मिटा दो। मेरे मित्रों का एवं मेरे रक्षा करो।

Saturday, August 24, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
39 पदमेकं न गच्छेत्तु यदिच्छेश्शुभमात्मन:
कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्र हि गच्छति।
40 तत्र मंत्रार्थ लाभच्छ विजय: सर्वकालिक:
यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चिंत।
41 परमैश्वैर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान
र्निभये जायते मर्त्य: संग्रामेष्व अपराजिता।
       जो व्यक्ति अपने श्रेय और रक्षा चाहते है, वह कवच के बिना नहीं निकलना चाहिए। चण्डीका कवचं मनुष्य को संग्राम में सर्व विजेता एवं अभीष्ट और धनलाभ आदि प्राप्ति करवाता है।
       हे मां ब्रह्माण्डधारिणी, है महामाये, मेरे देश पर विद्रोह करने वालों को मिटा दो। मेरे मित्रों को और मेरे रक्षा करो।

Thursday, August 22, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
36 गोत्रमिद्राणि में रक्षेद पशून में रश्र चण्डीके
37 पुत्रान रक्षेनमहालक्ष्मीं भार्या रक्षतु भैरवी 
मार्गों क्षेमंकरी रक्षेद विजया सर्वत: स्थिता।
38 रक्षा हीनं तु तत् स्थानं वर्जितं कवचेनतु
तत् सर्वं रक्षा में देवी जयंती पापनाशिनी।
     हे मां इंद्राणी, आप मेरे गोत्र के रक्षा करें और मां चण्डीका मेरे पशुओं को रक्षा कीजिए। मेरे सन्तानों को मां महालक्ष्मी और कलत्र को मां भैरवी रक्षा करें। मेरे मार्गों को क्षेमंकरी एवं सर्व व्यापी मां विजया रक्षा करें। छुटगया सब स्थानों पर हे सर्वोत्कृष्ट मां जयंती देवी, हे पाप नाशिनी आप रक्षा करें। 
    हे मां सर्वरूपधारिणी, है महामाये, मेरे देश पर विद्रोह करने वालों को मिटा दो। मेरे मित्रों को और मुझे रक्षा करो।

Wednesday, August 21, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
33 ज्वालामुखी नखज्वालामभेद्या सर्स्न्धिषु
शुक्लं ब्रह्माणी में रक्षेद च्छायां छत्रेश्वरी तथा।
34 अहञारं मनो बुद्धिं रक्षा में धर्मकारिणी 
प्राणापानौ तथा व्यानसमानोदानमेव च
यश: कीर्ति च लक्ष्मीं च सदारक्षतु चक्रिणी।
    शंख कान्ति को देवी ज्वालामुखी और सन्धियां को मां अभेद्या संभालते हैं। च्छायां को छत्रेश्वरी रक्षा करते हैं। ब्रह्माणी मेरे वीर्य को रक्षा करते हैं और धर्मचारिणी मां मेरे अहंकार, मन एवं बुद्धि को संभालने वाली है। पज्च प्राणों तथा यश पराक्रम और ऐश्वर्या को मां चक्र धारिणि लक्ष्मी सदा रक्षा करते हैं। 
    हे महादेवी आप अनेक रूप धारण किये और शस्त्र लिए मेरे शत्रुओं को मारो। मेरा रक्षा करो मां।

Tuesday, August 20, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
31रोमकूपाणि कैमारी त्वचं वागीश्वरी तथा 
रक्त मज्ज वसा मांसान्यस्ति मेदांसि पार्वती 
32 आन्द्राणि कालरात्रिश्च पित्तंञमुकुडेश्वरी
पद्मावती पद्मकोशे कफे चूड़ामणि स्तथा।

   मेरे रोम कूपों में देवी कुमारी विराज होकर रक्षा करते हैं। त्वजा को वागीश्वरी और रक्त मज्ज वसा मांस अस्ति मेदस आदि को माता पार्वती रक्षा करते हैं। अथडी को मां कालरात्रि और पित्त अग्नि को मुकुटेश्वरी संभाली है। देवी पद्मावती पद्मकोशें में रहकर वायुओं को रक्षा करते हैं और कब को मां चूड़ामणि रक्षा करते हैं।
    इस प्रकार मेरे हर अंगों को शस्त्र धारिणि माताएं संभालते तो मुझे कोई डर नहीं। 

Monday, August 19, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
नखान्शूलेश्वरी रक्षेद कुक्षै रक्षेनलेश्वरी
स्तनै रक्षेदमहादेवी मन:श्शेकविनाशिनी 26
हृदयं ललिता देवी उदरं शूलधारिणी 
नाभिं च कामिनी रक्षेद गुह्यं गुह्येश्वरी तथा 27
भूतनाथा च ओढ्रं में च गुदं महिष वाहिनी
कड्यां भगवती रक्षेद जानूनि विंध्यवासिनी 28
जंखे महाबला प्रोक्ता जानुमथ्ये विनायकी
गुलफयो्र नरसिंही च पादपृष्ठे अमितोजसी 29
पादांगुली: श्रीधरी च पादाथस्तलवासिनी
नखान दंष्ड्राकराली च केशांश्चैवो्रधकेशिनी 30
मेरे नखरों को मां शूलेश्वरी, पेट को नलेश्वरी रक्षा करते हैं। स्तनों को महादेवी तथा मन को मां शोकविनाशिनी रक्षा करते हैं। हृदय को ललिता देवी और उदरं शूलधारिणी, नाभि देश को मां कामिनी तथा गुह्य भाग को मां गुह्येश्वरी रक्षा करने वाले हैं। मेरे लिंग को भूतनाथा और गुदा को महिषवाहिनी, कमर को मां भगवती एवं गुढनों को मां विंध्यवासिनी रक्षा करने रहते हैं। मेरे जंखे प्रसिद्ध मां महाबला और जानुओं को विनायकी रक्षा करते हैं। ऐड़ियों को मां नरसिंही पादों पर अमितोजसी रक्षा करते हैं। पादांगुलियां मां श्रीधरी पादों के नीचे मां तलवासिनी रक्षा करते हुए विराजमान हैं। मेरे पादनखों को दंष्ड्राकराली संभालते हैं और केश मां ऊर्थकेशिनी के रक्षा में है। 
ऐसे मेरे अंग अंग में मां के शक्ति विराजमान हो कर मेरे रक्षा करते हैं, मुझे कोई डर नहीं है।

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
अथरे च अमृतलाल जिह्वायांं तु सरस्वती 
सन्तान रक्षतु कौमारी कण्ढमथ्येतु चण्डीका 22
खण्डिकां चित्रख्ण्डा च महामाया च तालुके
कामाक्षी चिबुकं रक्षेद वाचन में सर्वमंगला 23
ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ढवंशे धर्नुधारी 
नीलग्रीवा बहि:अण्डे नलिकां नलकूबरी24
खड्गधारिणी उभ्वै स्कथौ बाहू मैं वज्रधारिणी
हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदंबिका चांञुलीषुच 25

     मेरे औष्ढों में देवी अमृतलाल, जिह्वा में मां सरस्वती, दंन्दों में कुमारी और गला में मां चण्डीका रक्षा करने हेतु रहते हैं। कण्ठ खण्डिका में देवी चित्रखण्डा तालू में महामाया उपस्थित हो। चिहुंक में कामाक्षी और वचनों में मां सर्वमंगल रहकर रक्षा करते हैं। मेरे गले में भद्रकाली एवं रीड के हड्डी में धनुर्धरी कंण्ठ पृष्ठ में देवी नीलग्रीवा और कण्ठ नली में नलकूबरी रह कर रक्षा करते हैं। मेरे कन्धों को खड्गधारिणी भुजाएं वज्रधारिणी, बाहुओं को दण्डिनी और अंगुलियों को मां अंम्बिका रक्षा करते हैं। हे माताएं हमारे शत्रुओं को मारो, हमें और हमारे देश को रक्षा करो।

Friday, August 16, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मोवाच: 
जया मे चाग्रत स्तातु विजया स्तातु पृष्ठत:
अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे च अपराजिता 18
शिखामुद्योतिनी रक्षेदुमा मूर्थिनि व्यवस्थिता
मालाधारी ललाटे च भृवौ रक्षेद् यशस्विनी 19
त्रिनेत्रा च भ्रुवो्रमध्ये यम्ख्ण्डा च नासिके
शंखिनी चक्षुषोरमध्ये श्रोत्रयोर द्वारवासिनि 20
कपोलै कालिका रक्षेत कर्णमूले तु शंकरि
नासिकायां सुगन्धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका 21
         जयादेवी मेरे रक्षा करने सामने खड़ी है। पीछे से विजया देवी मुझे रक्षा करते हैं। बाएं तरफ अजिताभ देवी और दक्षिण दिशा में अपराजिता मुझे संभालते हैं। मेरे शिखा केलिए उद्योतिनी, मूर्था उमा देवी और मालाधारी ललाट के रक्षा करते हैं। भ्रूवों को यशस्विनी देवी रक्षा करते हैं।
मां त्रिनेत्रा मेरे भ्रू मध्य, नासिकायां देवी यम्ख्ण्डा, नयनों को शँखिनी कानों को देवी द्वारवासिनी रक्षा करते हैं। कपोलों पर कालिका माता, कानों को शञरी, नासिकदंण्ड पर देवी सुगंन्धा, ओढों को चर्चिका देवी रक्षा करने वाले हैं।

Thursday, August 15, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मोवाच: 
प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेयामग्नि देवता 
दक्षिणे/वतु वाराही नैर्यित्यां खड्गधारिणी 15
प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद वायव्यं मृग वाहिनी 
उदीच्यां पातु कौबेरी ऐशान्यां शूलधारिणी 16
ऊर्थ्वं ब्रह्माणी में रक्षेदथस्ताद् वैष्णवी तथा 
एवं दशदिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहना।17

    पूर्व दिशा में इन्द्राणी मेरे रक्षा करती है। अग्नि कोण में अग्नि देवता और दक्षिण दिशा में वाराही देवी मुझे संभालते हैं। निर्यति कोण में खड्गधारिणी निर्यति देवी हमारे रज्ञा करते हैं। ऐसे वायु देवता, कुबेर, ईशान शक्ति, ब्रह्माणी एवं वैष्णवी देवी हमें सर्व शस्त्र समेत रक्षा करने उपस्थित हो। हे दश दिशाएं के मातृशक्ति हमारे सभी शत्रुओं को मारो, हमें शरण दो।

Tuesday, August 13, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मोवाच: 
प्रेतसंस्ता तु चामुंडा वाराही महिषासना
ऐन्द्रि गजसमारूढा वैष्णवी गरुडासना।9
माहेश्वरी वृषारूढ़ा कौमारी शिखिवाहना
ब्राह्मी हंसमारूढा सर्वाभरणभूषिता: ।10
नानाभरणशोभाढ्या नाना रत्नोपशोभिता:
दृश्यन्ते रथमारूढ देव्या: क्रोध समाकुला:11
     चामुंडा, वाराही, इन्द्रानी, वैष्णवी, महेश्वरी, कुमारी, ब्रह्माणी आदि रत्न विभूषित अपने इष्ट वाहन के रथों पर सवार सप्त माताएं सभी भक्त रक्षा करने आए हैं। हे माताएं, असुर समान उपद्रवियों को मारो और हमें उनसे बजाता रहना।

Monday, August 12, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मोवाच: 
अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गीतों रणे 
विषमे दुर्गामे चैव भयार्ता: शरणं गत: 6
नतेषां जायते किञ्चितशुभं रणसंकडे
नापदं सत्यं पश्यामि शोकदु:ख भयं नहीं।7
यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषामृद्धि: प्रजायते 8
नौ दुर्गा माताओं का नाम कीर्तन करते माता के शरण लेने वाले को, अग्नि के बीच, या शत्रुओं कै बीच में भी दुख और आपत्ति नहीं होगी। दुःख, विग्न या प्राणभय के समय व्याकुल होकर मां को शरण लेने से आपत्ति से मुक्त हो जाता है। भक्ति पूर्वक देवी को कीर्तन पूजन करें तो,सभी ऐश्वर्या मिलेगा यह निश्चित है।

Sunday, August 11, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।
प्रधमं शैलपुत्रीति द्वितीयं ब्रह्मचारिणि
तृतीयं चन्द्रखण्डेति कुम्भाण्डेति चतुर्थकं।।3
पञमं स्कंदमातेति षष्ठं कर्तायनीति च
सप्तमं कालरात्रिति महागौरीति चाष्टमं।। 4
नवमी सिध्दिदा प्रोक्ता नवदुर्गा: प्रकीर्तिता: उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना।। 5

    शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रखण्डा, कुशमाण्डा, स्कन्द माता, कार्तत्यायनि, कालरात्रि, महागौरी, सिध्दिदात्री ऐसे नै रूप में माता भक्तों को संभालने केलिए धारण करती है। हर एक माता की रूप को प्रणाम, मां मेरे शत्रुओं को मारो, हमें शरण दो।

Saturday, August 10, 2024

चण्डीका स्तुती

आपदिं किं करणीयं  
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।
देवी कवच स्तोत्र 
ॐ नमझण्डिकायै 
मार्कण्डेय उवाच:
यदं गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणां 
मन्न अस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह 1
ब्रह्मोवाच: 
अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकं
देव्यास्तु कवचं दिव्यं तत् श्रृणैष्व महामुने 2
हे प्रभु, ब्रम्हा,‌ आप मुझे परमं रहस्यमय मंत्र जो उपाय सर्व रक्षक एवं दुष्ट नाशक हो वह बताता है, वह सुनिए।

Friday, August 9, 2024

चण्डीका स्तुती

आपदिं किं करणीयं  
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।  

देवी कवच स्तोत्र 

अस्य श्री चण्डिका कवचस्य ब्रह्मा ऋषि: अनुष्टुप च्छंन्द: चामुंडा देवता अंग न्यास मायरो बीजं दिग्बंन्ध देवतास्तत्वं श्री त्रिगुणा देवी प्रीत्यर्थे जपे विनियोग:

     कवच स्तोत्र, हमारे सभी अन्दर - बाह्य हमलों से कवच बनकर देवी हमें बचाता है। देवी अनेक रूप लेकर अपने अंदर रहकर रक्षा करवाते हैं। 

Saturday, August 3, 2024

चण्डीका स्तुती

आपदिं किं करणीयं  
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।  
कीलक स्तोत्र 
कीलक स्तोत्र 
न चैवाप्यपठततस्य भयं क्वापीहजायते
नापमृत्युवशं याति मृतो मेक्षमवाप्नुयात् 11
ज्ञात्वा प्रारभ्य कुर्वीत ह्यकु्रवाणो विनश्यति
ततो ज्ञात्वैव संब्न्नमिदं प्रारभ्यते बुधै:12
सौभाग्यादि च यत़ किञ्चित दृश्यते ललनाजने
तत़र्सवं तत़प्रसादेन तेन जाप्यमिदं शुभं 13
शनैस्तु जप्यमाने/स्मिन स्तेत्रे संबत्ति कारकै:
भवत्येव समग्रापि तत् प्राभ्यमेव तत् 14
ऐश्वर्यां यत़ प्रसादेन सैभाग्यारेग्य संबद: 15
शत्रुहानि: परो मोक्ष: स्तुयते सा न किं जनै: 

चण्डीका स्तुती करने वाले को कभी अपमृत्यु नहीं होगा। वह दुनिया भर भयरहित; दुष्टों, चोर, हिंसक आतंकियों से बजाता है। इस लिए यह मंत्र कीलक आदि साथ पठना चाहिए। सैभाग्य आदि सब लाभ उन्हें मिलेगा। मनोजाप से ऐश्वर्या और उच्च जाप करने से सब पुरुषार्थ प्राप्त होता है। चण्डीका थ्यान मोक्षदायिनी भी है। 

Thursday, August 1, 2024

चण्डीका स्तुती

कीलक स्तोत्र 
आपदिं किं करणीयं
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।।
न मन्त्रो नैषधं तत्र न किजिदपि विद्यते।
विनाश जप्येन सिध्येत सर्वमुघ्चाडनादिकं 5
समग्राण्यपि सिध्यन्ति लोकशंकामिमां हर:
कृत्वा निमन्त्रयामास सरवमेवमिदं शुभं 6
स्तोत्रं वै चण्डीकायास्तु उच्च गुह्यं चकार स:
समाप्तिर्न च पुण्यस्य तां यथावन्नियन्त्रणं।7
सो/पि क्षेममवाप्नोति सर्व मेव न संशय: 8
कृष्णयां वै चतुर्दश्यांमषडम्यं वा समाहित:
ददाति प्रतिगृहणाति नान्यथैषा प्रसीदति 9
ईथं रुपेण कीलेन महादेवेन कीलितं 
यो निष्कीलां विधायैनां नित्यं जाति संस्पुठं 
स सिंध: स गण: सो/पि गन्धर्वो जायते/वने 10
यह मंत्र पड़नेवाले को और कोई मंत्र औषध जरूरत नहीं। उन को उच्चाटन आदि सब प्राप्त होता है। इस मंत्र से सबकुछ प्राप्त होता था और अन्य मंत्रें तिरस्कृत न होने, शिवजी, नियम आचरणों से इस मंत्र को रहस्यमय बना दिया। फिर भी, इसे भक्ति पूर्वक मनाया तो सिद्ध होता है। कृष्णाष्टमि को या कृष्ण ज्चतुरदशि उपासना, अपने सब धन देवी को समर्पित कर के, उन से अवश्यनुसार उधार लेना है। इस से महादेव से लगा हुआ प्रतिबंधें निकल जाता है। चण्डी पाठ करने वाले को कभी भी राक्षस उग्रवादी दुष्टों से भर नहीं होगा, वह गन्धर्व जैसे सदा सुखी रहेंगे।।