आपदिं किं करणीयं
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।
देवी कवच स्तोत्र
अस्य श्री चण्डिका कवचस्य ब्रह्मा ऋषि: अनुष्टुप च्छंन्द: चामुंडा देवता अंग न्यास मायरो बीजं दिग्बंन्ध देवतास्तत्वं श्री त्रिगुणा देवी प्रीत्यर्थे जपे विनियोग:
कवच स्तोत्र, हमारे सभी अन्दर - बाह्य हमलों से कवच बनकर देवी हमें बचाता है। देवी अनेक रूप लेकर अपने अंदर रहकर रक्षा करवाते हैं।

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