आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
45 अभिचारिणि सर्वाधिक मन्त्रयन्त्राणि भूतले
भूचरा: खेचराझैव जलजाझौपदेशिका:
सहजा: कुलजा माला डाकिनी शाकिनी तथा
46 अनदरीक्षचरा खोरा डकिनैश्च महाबला:
ग्रहभूतपिशाचाश्च यक्ष गन्धर्वराक्षसा:
47 ब्रह्मराक्षसवेताला: कुशमाण्डा भैरवाय:
नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदिसंस्तिते।
मां महामाया के इस कवच जिसने धारण किया हो, उन्हें इस दुनिया में कोई मंत्र - तंत्र और आभिचार; ज़मीन पर या पानी में किया गया हो, दुष्ट देवताओं के बाधा, डाकिनी, शालिनी आदि दुर्दैवता, भूत-प्रेत आदि, यक्ष- गन्धर्व, राक्षस -ब्रह्मरक्षस, वेताल, कुशमाण्ड, भैरव आदि के उपद्रवियों; देवी कवच से नाश होता है।
मां परमेश्वरी के स्मरण से उपासना से हमारे सारे समस्या हल होगी। शत्रुहानि होता है। संतुष्टि और ऐश्वर्या बढ़ती है।

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