कीलक स्तोत्र
अस्य श्री कीलक मंत्रस्य शिव ऋषि, अनुष्टुप च्छंन्द श्री महासरस्वती देवता, श्री जगदंबा प्रसाद सिधि केलिए जाप करें।
मार्कण्डेय उवाच:
विशुद्ध ज्ञान देहात तृवेदीदिव्य चक्षुसे
श्रेय: प्राप्तिनिमित्ताय नमः सोमार्ध धारिणे।।
सर्व मेतद्विजानीयानमन्त्राणामभि कीलकं
सो/पि क्षेममवाप्नोति सततं जाप्यतत्परा:
सिध्यन्तुच्चाडनादीनि वस्तुनि सकलान्यपि।
ऐतेन स्तुवतां देवीं स्तोत्र मात्रेण सिद्धयति।।
श्री परमेश्वर को नमन करते हैं। हमारे ऊपर लगा हुआ शपादि दोषशमन केलिए यह मन्त्रों का उपासना करना है। इसके उपासना से स्वयं के भूत-प्रेत, मारण उच्चाटन - नष्ट होते हैं। यह सब लाभ चण्डीका थ्यान करने से ही मिलता है।
