Wednesday, July 31, 2024

चण्डिका स्तोत्र

कीलक स्तोत्र 

अस्य श्री कीलक मंत्रस्य शिव ऋषि, अनुष्टुप च्छंन्द श्री महासरस्वती देवता, श्री जगदंबा प्रसाद सिधि केलिए जाप करें।

मार्कण्डेय उवाच:

विशुद्ध ज्ञान देहात तृवेदीदिव्य चक्षुसे 

श्रेय: प्राप्तिनिमित्ताय नमः सोमार्ध धारिणे।।

सर्व मेतद्विजानीयानमन्त्राणामभि कीलकं

सो/पि क्षेममवाप्नोति सततं जाप्यतत्परा:

सिध्यन्तुच्चाडनादीनि वस्तुनि सकलान्यपि।

ऐतेन स्तुवतां देवीं स्तोत्र मात्रेण सिद्धयति।।


श्री परमेश्वर को नमन करते हैं। हमारे ऊपर लगा हुआ शपादि दोषशमन केलिए यह मन्त्रों का उपासना करना है। इसके उपासना से स्वयं के भूत-प्रेत, मारण उच्चाटन - नष्ट होते हैं। यह सब लाभ चण्डीका थ्यान करने से ही मिलता है। 

Tuesday, July 30, 2024

चण्डीका स्तुती

आपदिं किं करणीयं  
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।  
देवी जनोद्दाम दत्तान्दोदयेंबिके।
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।21
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीं।
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।22
 तारिणीं दुर्गा संसार सागरस्य कुलोद्भवां।
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।23
इदं स्तोत्रं पठित्यातु महास्तोत्रं पठेन्नर:।
सतुसप्तशती संख्या वरमाप्नोति संपत:।।
भक्तजनों को सदानंद दाई माते, देवी हमें सरुप विजय एवं यश देने कृपा करें। हमारे शत्रु विनाश करो। आप की सेवा में मेरे धर्म पत्नी शुभमन सहयोगी बनें, हमें संसार सागर पार करवा दें। सप्तशती मंत्र हमें महापुण्य जमाएं।

Monday, July 29, 2024

चण्डीका स्तुती

आपदिं किं करणीयं  
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।  
कृष्णेन संस्तुते देवी शाश्वतभक्त्यातथांबिके
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।। 16
हिमाचल सुतानाथपूजिते परमेश्वरी 
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।। 17
सुरासुरशिरोरत्ननिखृष्टचरणांबिके
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।18
इन्द़ाणीपतिसद्भावपूजिते परमेश्वरी 
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।। 19
देवी प्रचण्डदोरदण्ड दैत्य दर्प विनाशिनी
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।। 20
हे माते,श्री कृष्ण ने कही बार भक्ति पूर्वक स्तुती किये माते, मेरे दुश्मनों को मारो। हिमाचलपुत्री पार्वती पूजनेवाली परमेश्वरी अंबिके, मेरे शत्रुओं को मारो।
 देवी और असुर दोनों आपके चरणों में मस्तक लगाते हैं, उस देवी हमारे शत्रु नाशक करो। उत्तम भक्ति से इन्द्र से पूजित परमेश्वरी आप हमारे शत्रु नाश करो। 
अति शक्तिशाली असुर जनों के गर्व शमन करने वाली अंबिके तू हमारे शत्रु विनाश करो, हमें सरुप, विजय एवं यशस्वी बनाओ।

चंडिका स्थुती

आपदिं किं करणीयं  
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।  
11 विदेहि द्विषतांनाशं विदेहि बलमुच्चकै :
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।
12 विदेशी देवि कल्याणं विदेहि विपुलं श्रियं 
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।
13 विद्यावन्दं यशस्वन्दं लक्ष्मी वन्दं जनं कुरु ।
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।
14 प्रच्ण्ड दैत्य दर्पग्ने चण्डिके प्रणताय मैं।
रूपंदेहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।
15 चतुर भुजे चतुर व्क्त्र संस्तुते परमेश्वरी।
रूपंदेहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।

हे जगदंबा, मेरे शत्रुओं का नाश कीजिए। मुझे शक्ति दीजिए। मुझे मंगल और ऐश्वर्या दो, आपको पूजनेवाले हमें अध्यात्म विद्या दें, मेरे शत्रुओं को मारो, मुझे पराक्रम कीर्ति दीजिए। अति पराक्रमि दैत्यों के दर्प को नाश करने वाली मां, मेरे शत्रुओं को मारो। चार भुजाएं वाली मां, विधाता पूजनेवाला हे परमेश्वरी, आपके इस सेवक को - मुझको सरुप, यश और विजय प्रदान करो, तू हमारे देश पर विद्रोह करनेवालों को मारो। हमें रक्षा करो।

Saturday, July 27, 2024

चण्डीका स्तुती

आपदिं किं करणीयं स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।  
8 स्तुवद्भ्योभक्तिपूर्वं त्वां चण्डीके व्याधिनाशिनि 
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।
9 चण्डीके सत्यं ये त्वां अर्चयन्तित भक्तिद
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।
10 देसि सौभाग्यमारोग्यं देहि देवी परं सुखं
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।

हे मां चण्डीके, भक्ति से आपको पूजनेवाले को आप रूप, विजय, यश आदि प्रदान करते हैं, मुझे सौभाग्य, आरोग्य और सुखी बनाओ। हमारे वैरियों का नाश करो।।

Friday, July 26, 2024

चण्डीका थ्यान

आपदिं किं करणीयं
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।  
6 अचिंत्य रुपचरिते सर्व शत्रु विनाशिनी
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।
7 नतेभ्य: सर्वदा भक्ता चण्डीके प्रणताय में 
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।
 
हे मां, कल्पना से परे रूप एवं क्षमतावाली मां तू सभी शत्रु संहार करने समर्थ रखते हैं। आप नमन करने वाले सभी को और मुझको सरुप, यश और विजय प्रदान करो, तू हमारे देश पर विद्रोह करनेवालों को मारो। हमें रक्षा करो।