Friday, July 26, 2024

चण्डीका थ्यान

आपदिं किं करणीयं
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।  
6 अचिंत्य रुपचरिते सर्व शत्रु विनाशिनी
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।
7 नतेभ्य: सर्वदा भक्ता चण्डीके प्रणताय में 
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।
 
हे मां, कल्पना से परे रूप एवं क्षमतावाली मां तू सभी शत्रु संहार करने समर्थ रखते हैं। आप नमन करने वाले सभी को और मुझको सरुप, यश और विजय प्रदान करो, तू हमारे देश पर विद्रोह करनेवालों को मारो। हमें रक्षा करो।

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