Tuesday, July 30, 2024

चण्डीका स्तुती

आपदिं किं करणीयं  
स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।  
देवी जनोद्दाम दत्तान्दोदयेंबिके।
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।21
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीं।
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।22
 तारिणीं दुर्गा संसार सागरस्य कुलोद्भवां।
रुपं देहि जयं देहि यशोदेहि द्विषोजहि।।23
इदं स्तोत्रं पठित्यातु महास्तोत्रं पठेन्नर:।
सतुसप्तशती संख्या वरमाप्नोति संपत:।।
भक्तजनों को सदानंद दाई माते, देवी हमें सरुप विजय एवं यश देने कृपा करें। हमारे शत्रु विनाश करो। आप की सेवा में मेरे धर्म पत्नी शुभमन सहयोगी बनें, हमें संसार सागर पार करवा दें। सप्तशती मंत्र हमें महापुण्य जमाएं।

No comments:

Post a Comment