Monday, August 19, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स़मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
नखान्शूलेश्वरी रक्षेद कुक्षै रक्षेनलेश्वरी
स्तनै रक्षेदमहादेवी मन:श्शेकविनाशिनी 26
हृदयं ललिता देवी उदरं शूलधारिणी 
नाभिं च कामिनी रक्षेद गुह्यं गुह्येश्वरी तथा 27
भूतनाथा च ओढ्रं में च गुदं महिष वाहिनी
कड्यां भगवती रक्षेद जानूनि विंध्यवासिनी 28
जंखे महाबला प्रोक्ता जानुमथ्ये विनायकी
गुलफयो्र नरसिंही च पादपृष्ठे अमितोजसी 29
पादांगुली: श्रीधरी च पादाथस्तलवासिनी
नखान दंष्ड्राकराली च केशांश्चैवो्रधकेशिनी 30
मेरे नखरों को मां शूलेश्वरी, पेट को नलेश्वरी रक्षा करते हैं। स्तनों को महादेवी तथा मन को मां शोकविनाशिनी रक्षा करते हैं। हृदय को ललिता देवी और उदरं शूलधारिणी, नाभि देश को मां कामिनी तथा गुह्य भाग को मां गुह्येश्वरी रक्षा करने वाले हैं। मेरे लिंग को भूतनाथा और गुदा को महिषवाहिनी, कमर को मां भगवती एवं गुढनों को मां विंध्यवासिनी रक्षा करने रहते हैं। मेरे जंखे प्रसिद्ध मां महाबला और जानुओं को विनायकी रक्षा करते हैं। ऐड़ियों को मां नरसिंही पादों पर अमितोजसी रक्षा करते हैं। पादांगुलियां मां श्रीधरी पादों के नीचे मां तलवासिनी रक्षा करते हुए विराजमान हैं। मेरे पादनखों को दंष्ड्राकराली संभालते हैं और केश मां ऊर्थकेशिनी के रक्षा में है। 
ऐसे मेरे अंग अंग में मां के शक्ति विराजमान हो कर मेरे रक्षा करते हैं, मुझे कोई डर नहीं है।

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