देवी महात्म्य
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
48 मनोन्नतिरभवेद् राज्ञ: तेजोवृद्धिकरं परं
मनसा वर्थते सो/पि कीर्तिमण्डितभूतले
49 जपेद् सप्तशतीं चण्डीं कृत्वातु कवचं पुरा
यात्रा भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननं
तावत तिष्ठंति मेदिन्यां सन्दति: पुत्र पौत्रिकी
50 देहान्ते परं स्थानं तत् सचरैरपि दुर्लभं
प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादत:
51 पार्वती परमा विद्या ब्रह्मविद्या प्रदायिनी
विशेषेणैव जन्दूनां नात्र सन्देहकारणं।
देवी कवचं पढ़ने वाले कीर्तिमान, राज्य सम्मानित होंगे। कवच कीर्तन उनको तेजस्वी बनाता है। कवचं पारायण करने के साथ चण्डीका स्तुती करने चाहिए। इस प्रकार देवी माहात्म्य कीर्तन करने वाले, पुत्र पौत्र आदि पुरुषार्थ प्राप्त कर अनंत काल यशस्वी रहकर शाश्वत परब्रह्म स्वरूप प्राप्त कर लेते हैं।
हे मां चण्डीके, आप हमारे देश पर अराजकता करने वाले को नाश करो। हमें सरुप विजय एवं यश देने कि वरदान करो। श्री महादेवै नमः

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