स़मरणीयं (अवलंबं ) पादं अंम्बिकां।।
कीलक स्तोत्र
कीलक स्तोत्र
न चैवाप्यपठततस्य भयं क्वापीहजायते
नापमृत्युवशं याति मृतो मेक्षमवाप्नुयात् 11
ज्ञात्वा प्रारभ्य कुर्वीत ह्यकु्रवाणो विनश्यति
ततो ज्ञात्वैव संब्न्नमिदं प्रारभ्यते बुधै:12
सौभाग्यादि च यत़ किञ्चित दृश्यते ललनाजने
तत़र्सवं तत़प्रसादेन तेन जाप्यमिदं शुभं 13
शनैस्तु जप्यमाने/स्मिन स्तेत्रे संबत्ति कारकै:
भवत्येव समग्रापि तत् प्राभ्यमेव तत् 14
ऐश्वर्यां यत़ प्रसादेन सैभाग्यारेग्य संबद: 15
शत्रुहानि: परो मोक्ष: स्तुयते सा न किं जनै:
चण्डीका स्तुती करने वाले को कभी अपमृत्यु नहीं होगा। वह दुनिया भर भयरहित; दुष्टों, चोर, हिंसक आतंकियों से बजाता है। इस लिए यह मंत्र कीलक आदि साथ पठना चाहिए। सैभाग्य आदि सब लाभ उन्हें मिलेगा। मनोजाप से ऐश्वर्या और उच्च जाप करने से सब पुरुषार्थ प्राप्त होता है। चण्डीका थ्यान मोक्षदायिनी भी है।

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