Thursday, August 29, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
मूर्ति रहस्यमयं
ऋषि उवाच 
3 कमलाञुशपाशाबजैरलंकृतचतर्तुभुजा
इन्दिरा कमला लक्ष्मी: सारुक्मांबुजासना।
4 या रक्तदन्दिका नाम देवी प्रोक्ता मयान्खा
तपस्या स्वरूपं वक्ष्यामि श्रुणु सर्व भयापहं। 
    हमारे रक्षा करने जगदंबा; इन्दिरा, कमला, लक्ष्मी और श्री के रूप में चतुर भुजा और कमल,अंकुश, पाश, शंख आदि हथियार लेकर जागरूक खड़ी है। माता के रक्तदन्दिका स्वरूप जो अति भयानक है, वह सूनो।

Wednesday, August 28, 2024

चण्डीका स्तुती

 देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
मूर्ति रहस्यमयं
ऋषि उवाच 
1 नन्दाभगवती नाम या भविष्यति नन्दजा
सा स्तुता पूजिता भक्त्या वशीकुर्याजगत्रयं।
2 कनकोत्तमकान्ति: सुकान्तिकनकांम्बरा
देवी कनकवर्णाभा कनकोत्तमभूषणा। 
     लोकनन्मार्थ नन्दगोप के पुत्रि रूप में जन्मा नन्दाभगवती को भक्ति एवं श्रद्धापूर्वक पूजन कीर्तन करने वाले को तीनों लोक में सम्मान मिलेगा। 
    वह नन्दा देवी कनकवर्णकान्ति से कनक वर्ण से सुन्दर और पटांबर और कनकाभरण से अलंकृत है।
   हे मां चण्डीके, हमारे देश रक्षा के संकल्प में हम आपको पूजता है। हमारे रक्षा करो मां।

Tuesday, August 27, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
48 मनोन्नतिरभवेद् राज्ञ: तेजोवृद्धिकरं परं
मनसा वर्थते सो/पि कीर्तिमण्डितभूतले
49 जपेद् सप्तशतीं चण्डीं कृत्वातु कवचं पुरा
यात्रा भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननं
तावत तिष्ठंति मेदिन्यां सन्दति: पुत्र पौत्रिकी
50 देहान्ते परं स्थानं तत् सचरैरपि दुर्लभं 
प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादत:
51 पार्वती परमा विद्या ब्रह्मविद्या प्रदायिनी 
विशेषेणैव जन्दूनां नात्र सन्देहकारणं।
   देवी कवचं पढ़ने वाले कीर्तिमान, राज्य  सम्मानित होंगे। कवच कीर्तन उनको तेजस्वी बनाता है। कवचं पारायण करने के साथ चण्डीका स्तुती करने चाहिए। इस प्रकार देवी माहात्म्य कीर्तन करने वाले, पुत्र पौत्र आदि पुरुषार्थ प्राप्त कर अनंत काल यशस्वी रहकर शाश्वत परब्रह्म स्वरूप प्राप्त कर लेते हैं।
   हे मां चण्डीके, आप हमारे देश पर अराजकता करने वाले को नाश करो। हमें सरुप विजय एवं यश देने कि वरदान करो। श्री महादेवै नमः

Monday, August 26, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
45 अभिचारिणि सर्वाधिक मन्त्रयन्त्राणि भूतले 
भूचरा: खेचराझैव जलजाझौपदेशिका:
सहजा: कुलजा माला डाकिनी शाकिनी तथा 
46 अनदरीक्षचरा खोरा डकिनैश्च महाबला:
ग्रहभूतपिशाचाश्च यक्ष गन्धर्वराक्षसा:
47 ब्रह्मराक्षसवेताला: कुशमाण्डा भैरवाय:
नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदिसंस्तिते।
     मां महामाया के इस कवच जिसने धारण किया हो, उन्हें इस दुनिया में कोई मंत्र - तंत्र और आभिचार; ज़मीन पर या पानी में किया गया हो, दुष्ट देवताओं के बाधा, डाकिनी, शालिनी आदि दुर्दैवता, भूत-प्रेत आदि, यक्ष- गन्धर्व, राक्षस -ब्रह्मरक्षस, वेताल, कुशमाण्ड, भैरव आदि के उपद्रवियों; देवी कवच से नाश होता है।
  मां परमेश्वरी के स्मरण से उपासना से हमारे सारे समस्या हल होगी। शत्रुहानि होता है। संतुष्टि और ऐश्वर्या बढ़ती है।


Sunday, August 25, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 

आपदिं किं करणीयं ?

स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।

ब्रह्मेवाच :

42 त्रैलोक्ये तु भवेत् पूज्य: कवचेनावृत: पुमान

43 इदं तु देव्या: कवचं देवानामपि दुर्लभं

य: पठेत प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रधयान्युत:

दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्य च अपराजिता:

44 जीवेद्वर्षशतं संग्रामपमृत्यु विवर्जित:

नश्यन्ति व्याधय: सर्वे लूटता विस्फोटकादय

स्थावरं जंगमं चापि कृत्रिमं चापि यद्विषं।

    कवच से आरक्षित पुरुष, तीनों लोकों में पूजनीय बनता है। देवों को भी दुर्लभ यह देवी कवच, जो जन रोज त्रिसंध्या में श्रद्धा से पड़ता है, उनको देवी के वरदान मिलेंगे।  उनको त्रिलोक में पराजय न होगा, मगर विजय प्राप्त होती हैं। उनको अपमृत्यु नहीं होती है तथा वह सज्जन सौ साल, व्याधिहीन जीवन बिताएंगे। उनपर लगाया हुआ सभी काला टोना खत्म हो जाती है। 

     मां, है महामाये, मेरे देश पर विद्रोह करने वालों को मिटा दो। मेरे मित्रों का एवं मेरे रक्षा करो।

Saturday, August 24, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
39 पदमेकं न गच्छेत्तु यदिच्छेश्शुभमात्मन:
कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्र हि गच्छति।
40 तत्र मंत्रार्थ लाभच्छ विजय: सर्वकालिक:
यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चिंत।
41 परमैश्वैर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान
र्निभये जायते मर्त्य: संग्रामेष्व अपराजिता।
       जो व्यक्ति अपने श्रेय और रक्षा चाहते है, वह कवच के बिना नहीं निकलना चाहिए। चण्डीका कवचं मनुष्य को संग्राम में सर्व विजेता एवं अभीष्ट और धनलाभ आदि प्राप्ति करवाता है।
       हे मां ब्रह्माण्डधारिणी, है महामाये, मेरे देश पर विद्रोह करने वालों को मिटा दो। मेरे मित्रों को और मेरे रक्षा करो।

Thursday, August 22, 2024

चण्डीका स्तुती

देवी महात्म्य 
आपदिं किं करणीयं ?
स्मरणीयं पादं अंम्बिकां।
ब्रह्मेवाच :
36 गोत्रमिद्राणि में रक्षेद पशून में रश्र चण्डीके
37 पुत्रान रक्षेनमहालक्ष्मीं भार्या रक्षतु भैरवी 
मार्गों क्षेमंकरी रक्षेद विजया सर्वत: स्थिता।
38 रक्षा हीनं तु तत् स्थानं वर्जितं कवचेनतु
तत् सर्वं रक्षा में देवी जयंती पापनाशिनी।
     हे मां इंद्राणी, आप मेरे गोत्र के रक्षा करें और मां चण्डीका मेरे पशुओं को रक्षा कीजिए। मेरे सन्तानों को मां महालक्ष्मी और कलत्र को मां भैरवी रक्षा करें। मेरे मार्गों को क्षेमंकरी एवं सर्व व्यापी मां विजया रक्षा करें। छुटगया सब स्थानों पर हे सर्वोत्कृष्ट मां जयंती देवी, हे पाप नाशिनी आप रक्षा करें। 
    हे मां सर्वरूपधारिणी, है महामाये, मेरे देश पर विद्रोह करने वालों को मिटा दो। मेरे मित्रों को और मुझे रक्षा करो।